Gangotri (One of CharDham): The Sacred Source
May 1st, 2008 | By GANGA of VARANASI
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भारत में हिन्दुत्व के ताने-बाने से जितने निकट से गंगा जुड़ी हुई है, वैसी कोई और नदी नहीं है। अनंत काल से आध्यात्मिक शुद्दिकर्त्ता के रूप में, पूजनीय तथा स्वास्थ्य एवं उन्नति प्रदान करने वाली गंगा, देश के सामाजिक एवं धार्मिक जीवन का हिस्सा है। इस पवित्र जल के आकर्षण तथा नदी के इर्द-गिर्द व्याप्त कहावतों एवं रहस्यों तथा इसके उद्गम ने पौराणिक युग से ही तपस्वियों तथा साहसिकों को आकर्षित किया है। गंगोत्री की तीर्थ यात्रा, उद्गमस्थल पर देवी गंगा को समर्पित मंदिर तथा उतराखंड के चार धामों मे से एक हिंदुओं के जीवन का पवित्रतम अनुभव है और उसी प्रकार यात्रियों के लिये उत्साह एवं प्रेरणावर्द्धक भी है। सदियों से मुक्ति की खोज में लाखों तीर्थयात्रियों ने गंगोत्री की यात्रा की है तथा पवित्र नदी ने उन्हें आवश्यक सहायता तथा आशा प्रदान है।
While the Ganga is mentioned only sparingly in the Rig Veda, it is in the Purans that the stories about the Ganga come into their own. Ganga, a beautiful vivacious young woman, it is said, was born out of Lord Brahma’s kamandalu (water vessel). There are two versions about this particular birth. One proclaims that Brahma washed Lord Vishnu’s feet after the latter got the universe rid of the demon Bali in his reincarnation as Vaman, and collected this water in his kamandalu.
The other relates to Lord Shiv, who healed the ragas and raginis (musical notes) who had been tortured by the misuse of music. While Lord Shiv sang to an audience of Narad Muni, Lord Brahma and Lord Vishnu, Lord Vishnu’s aura began to melt under the influence of the powerful music. Lord Brahma collected this in his kamandalu. It is from this kamandalu that Ganga was born, and she lived in the heaven under Lord Brahma’s tutelage.
Goumukh
ऐसी किंबदन्ती है कि पृथ्वी पर गंगा का अवतरण राजा भागीरथ के कठिन तप से हुआ, जो सूर्यवंशी राजा तथा भगवान राम के पूर्वज थे। मंदिर के बगल में एक भागीरथ शिला (एक पत्थर का टुकड़ा) है जहां भागीरथ ने भगवान शिव की आराधना की थी। कहा जाता है कि जब राजा सगर ने अपना 100वां अश्वमेघ यज्ञ किया (जिसमें यज्ञ करने वाले राजा द्वारा एक घोड़ा निर्बाध वापस आ जाता है तो वह सारा क्षेत्र यज्ञ करने वाले का हो जाता है) तो इन्द्रदेव ने अपना राज्य छिन जाने के भय से भयभीत होकर उस घोड़े को कपिल मुनि के आश्रम के पास छिपा दिया। राजा सगर के 60,000 पुत्रों ने घोड़े की खोज करते हुए तप में लीन कपिल मुनि को परेशान एवं अपमानित किया। क्षुब्ध होकर कपिल मुनि ने आग्नेय दृष्टि से तत्क्षण सभी को जलाकर भस्म कर दिया। क्षमा याचना किये जाने पर मुनि ने बताया कि राजा सगर के पुत्रों की आत्मा को तभी मुक्ति मिलेगी जब गंगाजल उनका स्पर्श करेगा। सगर के कई वंशजों द्वारा आराधना करने पर भी गंगा ने अवतरित होना अस्वीकार कर दिया। अंत में राजा सगर के वंशज राजा भागीरथ ने देवताओं को प्रसन्न करने के लिये 5500 वर्षों तक घोर तप किया। उनकी भक्ति से खुश होकर देवी गंगा ने पृथ्वी पर आकर उनके शापित पूर्वजों की आत्मा को मुक्ति देना स्वीकार कर लिया। देवी गंगा के पृथ्वी पर अवतरण के वेग से भारी विनाश की संभावना थी और इसलिये भगवान शिव को राजी किया गया कि वे गंगा को अपनी जटाओं में बांध लें।
(गंगोत्री का अर्थ होता है गंगा उतरी अर्थात गंगा नीचे उतर आई इसलिये यह शहर का नाम गंगोत्री पड़ा। भागीरथ ने तब गंगा को उस जगह जाने का रास्ता बताया जहां उनके पूर्वजों की राख पड़ी थी और इस प्रकार उनकी आत्मा को मुक्ति मिली। परंतु एक और दुर्घटना के बाद ही यह हुआ। गंगा ने जाह्नु मुनि के आश्रम को पानी में डुबा दिया। मुनि क्रोध में पूरी गंगा को ही पी गये पर भागीरथ के आग्रह पर उन्होंने अपने कान से गंगा को बाहर निकाल दिया। इसलिये ही गंगा को जाह्नवी भी कहा जाता है। बर्फीली नदी गंगोत्री के मुहाने पर, शिवलिंग चोटी के आधार स्थल पर गंगा पृथ्वी पर उतरी जहां से उसने 2,480 किलोमीटर गंगोत्री से बंगाल की खाड़ी तक की यात्रा शुरू की। इस विशाल नदी के उद्गम स्थल पर इसका नाम भागीरथी है जो उस महान तपस्वी भागीरथ के नाम पर है जिन के आग्रह पर गंगा स्वर्ग छोड़कर पृथ्वी पर आयी। देवप्रयाग में अलकनंदा से मिलने पर इसका नाम गंगा हो गया। माना जाता है कि महाकाव्य महाभारत के नायक पांडवों ने कुरूक्षेत्र में अपने सगे संबंधियों की मृत्यु पर प्रायश्चित करने के लिये देव यज्ञ गंगोत्री में ही किया था।
Ganga is also regarded as one of Lord Shiv’s consorts as he is often depicted with the Ganga on his matted hair.
Another legend has it that the Ganga came down to the earth in a human form and married King Shantanu — an ancestor of the Pandavs of the Mahabharat, yielded seven children, all of whom were thrown back into the river by her in an unexplained manner. The eighth - Bheeshma — was spared, thanks to King Shantanu’s intervention. However, Ganga then left him. Bheeshma plays a pivotal role throughout the grand epic of the Mahabharat.
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