Shree Krishna Janmotsav : How to Celebrate?

Shri Krishnajanmashtami Vrat : Sun 24, August 2008
Shree Krishna Janmashtami Pujan Vidhi
and
Aarti Shree KunjBihari Ki
इस दिन केले के खंभे , आम अथवा अशोक के पल्लव आदि से घरका द्वार
सजाया जाता है । दरवाजे पर मंगल कलश एवं मूसल स्थापित करे ।
रात्रिमें भगवान् श्रीकृष्ण की मूर्ति अथवा शालग्रामजी को विधिपूर्वक पंचामृत
से स्नान कराकर षोडशोपचार से विष्णु पूजन करना चाहिऐ ।
‘ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ‘ - इस मन्त्र से पूजन कर तथा वस्त्रालंकर
आदि से सुसज्जित करके भगवान् को सुन्दर सजे हुए हिंडोले में प्रतिष्ठित
करे । धूप, दीप और अन्नरहित नैवेध तथा प्रसूति के समय सेवन होने वाले
सुस्वाद मिष्ठान , जयेकेदार नमकीन पदार्थो एवं उस समय उत्तपन्न होने वाले
विभिन्न प्रकार के फल, पुष्पों और नारियल , छुहारे , अनार बिजौरे, पंजीरी,
नारियल के मिष्ठान तथा नाना प्रकार के मेवे का प्रसाद सजाकर श्रीभगवान्
को अर्पण करे ।
दिन में भगवान् की मूर्ति के सामने बैठकर कीर्तन करे तथा भगवान् का
गुणगान करे और रात्रिको बारह बजे गर्भ से जन्म लेने के प्रतीक स्वरुप
खीरा फोड़कर भगवान् का जन्म कराये एवं जन्मोत्सव मनाये । जन्मोत्सव
के पश्चात कर्पूरादी प्रज्वलित कर समवेत स्वर से भगवान् की आरती स्तुति
करे, पश्चात प्रसाद वितरण करे।
आरती कुंजबिहारी की
आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।
गले में बैजन्तीमाला बजावैं मुरलि मधुर बाला॥
श्रवण में कुंडल झलकाता नंद के आनंद नन्दलाला की ।। आरती…।।
गगन सम अंगकान्ति काली राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर-सी अलक कस्तूरी तिलक।
चंद्र-सी झलक ललित छबि श्यामा प्यारी ।। आरती…।।
कनकमय मोर मुकुट बिलसैं देवता दरसन को तरसैं।
गगन से सुमन राशि बरसैं बजै मुरचंग मधुर मृदंग।
ग्वालिनी संग-अतुल रति गोपकुमारी की ।। आरती…।।
जहाँ से प्रगट भई गंगा कलुष कलिहारिणी गंगा।
स्मरण से होत मोहभंगा बसी शिव शीश जटा के बीच।
हरै अघ-कीच चरण छवि श्री बनवारी की ।। आरती…।।
चमकती उज्ज्वल तट रेनू बज रही बृंदावन बेनू।
चहुँ दिशि गोपी ग्वालधेनु हँसत मृदुमन्द चाँदनी चंद।
कटत भवफन्द टेर सुनु दीन भिखारी की ।। आरती…।।
|| Jai Shree Radhey ||





