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Shri Ganpati Arti : गणपति की सेवा मंगल मेवा सेवा से सब विघ्न टरै

3 September 2008 Email This Post Email This Post Print this post Print this post

Shri Ganesh (Ganpati) Arti

श्रीगणेशजी की आरती

 

 

गणपति की सेवा मंगल मेवा सेवा से सब विघ्न टरै ।

तीन लोक तैतिस देवता द्वार खडे सब अरज कारै ॥

 

रिद्धी सिद्धी दक्षिण वाम विराजे ,अरु आंनद से चवँर ढ़ुले ।

धूप दीप और लिये आरती भक्त खडे जयकार करे ॥ गणपति की…

 

गुड के मोदक भोग लगे हैं,मुषक वाहन चढ़ा करैं ।

सौम्यरुप सेवा गणपति की ,विघ्न भाग जा दूर पडे ॥ गणपति की…

 

भादों मास और शुक्ल चतुर्थी दिन दोपहरी पूर्ण पडे ।

लियो जन्म गणपति प्रभुजी ने दुर्गा मन आनंद भये ॥ गणपति की…

 

अद्भुत बाजा बजे इंद्र का ,देववधू जयगान करे ।

श्री शंकर जी के आनंद उपज्यों ,नाम सुने सब विघ्न टरैं ॥ गणपति की…

 

आनि विधाता बैठे आसन ,इंद्र अप्सरा नृत्य करे ।

देख वेद ब्रम्हाजी जाको विघ्नविनायक नाम धरै ॥ गणपति की…

 

एक दंत गजबदन विनायक ,त्रिनयन रुप अनूप धरैं ।

ग खम्बा सा उदर पुष्ट हैं देख चंद्रमा हास्य करैं ॥ गणपति की…

 

दे श्राप श्री चंद्र देव को कलाहीन तत्काल करें ।

चौदह लोक मे फिरे गणपति तीन भवन में राज्य करैं ॥ गणपति की…

 

  उठी प्रभात जब धरें ध्यान को‌ई ताके कारज सर्व सरे ।

पूजा काले गावे आरती ,ताके सिर यश छत्र फिरे ॥ गणपति की…

 

गणपति की पूजा पहले करनी ,काम सभी निर्विघ्न सरै ।

श्री प्रताप गणपति प्रभुजी की हाथ जोड स्तुति करैं ॥ गणपति की…

 

गणपति की सेवा मंगल मेवा , सेवा से सब विघ्न टरै ।

तीन लोक तैतिस देवता द्वार खडे सब अरज करै ॥

 

 

|| Jai Ganesh ||

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