पुष्पदंत रचित शिव महिम्नस्तोत्र – Shiva Mahimna Stotra

शिव महिम्नस्तोत्रभगवान शिव के भक्तों के बीच काफी लोकप्रिय है, भगवान शिव की प्रार्थना के बीच सर्वश्रेष्ठ में से एक माना जाता है | इस स्तोत्र की रचना की परिस्थितियों के बारे में कथा इस प्रकार है|

एक बार चित्ररथ नाम के राजा ने एक अच्छा बगीचा निर्माण किया था| इस बगीचे में सुंदर फूल लग रहे थे. इन फूलों को हर दिन वह राजा भगवान शिव की पूजा में इस्तेमाल किया करता था |

एक गंधर्व जिसका नाम पुष्पदंत Pushpadant, इंद्र के दरबार में गायक था, एक दिन  सुंदर फूलों से मोहित हो कर उन्हें चुराने लगा , परिणाम स्वरुप राजा Chitraratha फूल भगवान शिव को अर्पित नहीं कर पा रहे थे | राजा बहुत कोशिश करने के बाद भी चोर को पकड़ने में असफल रहे  क्योंकि गन्धर्व में अदृश्य रहने की शक्ति थी |

अंत में राजा ने अपने बगीचे में शिव निर्माल्य फैला दिया | शिव निर्माल्य – बिल्व पत्र , फूल, वगैरह जो भगवान शिव की पूजा में इस्तेमाल किया गया है उसे कहते हैं | शिव निर्माल्य बहुत पवित्र माना जाता है|

चोर पुष्पदंत, यही नहीं जानते हुए, शिव निर्माल्य के ऊपर से चला गया, और उस से वह भगवान शिव के क्रोध का पात्र बन पड़ा | पुष्पदंत ने अपनी दिव्य शक्तिया खो दी | उसने क्षमा याचना के लिए भगवान शिव की महिमा स्तोत्र की रचना की | इस प्रार्थना में उसने शिव प्रभु की महानता को गाया |

भगवान शिव की कृपा से यह स्तोत्रं  बन गया है, और पुष्पदंत की दिव्य शक्तिया लौट आयी | यह प्रार्थना `शिव महिम्नस्तोत्र ‘ के रूप में जाना गया |

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