हरितालिका तीज व्रत : Haritalika (Vrat) Teej





shiv-parvati-ganeshji

Hartalika Vrat , Akhand Soubhagya ka Rakshak

Wed, 31 August  2011

‘भाद्रस्य कजली कृष्णा शुक्ला च हरितालिका ।’

संकल्प – ‘मम उमामहेश्वरसायुज्यसिद्धये हरितालिकाव्रतमहं करिष्ये ।’


भाद्रशुक्ल ३ को ‘हरितालिका’ का व्रत किया जाता है। शास्त्रमें इस व्रतके लिये सधवा, विधवा सबको आज्ञा है ।

पुर्वी उत्तर प्रदेश , मध्य भारत , राजस्थान , बिहार और झारखण्ड आदि प्रांतो में भाद्रपद शुक्ल तृतीया को सोभाग्यावती स्त्रियाँ अपने अखंड सौभाग्यकी रक्षा के लिए बड़ी श्रद्धा , विश्वास और लगन के साथ हरितालिका व्रत ( तीज ) का उत्सव मनाती हैं ।

जिस त्याग – तपस्या और निष्ठा के साथ स्त्रियां यह व्रत रखती है वह बड़ा कठिन है । इसमे फलाहार सेवन की बात तो दूर रही , निष्ठावाली स्त्रियाँ जलतक नहीं ग्रहण करती । इस व्रत में मुख्य रूप से शिव-पार्वती तथा गणेशजी का पूजन किया जाता है ।

इस व्रत को सर्व प्रथम गिरिराजनंदिनी उमा ने किया , जिसके फल स्वरुप भगवान् शिव पतिरूपमें प्राप्त हुए थे । इस व्रत के दिन स्त्रियां वह कथा भी सुनती हैं , जो पार्वतीजी के जीवन में घटित हुई थी ।

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Hartalika Teej Katha Hindi

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