In Satya Yuga, Daksha performed a yagna with a desire of taking revenge on Lord Shiva. Daksha was angry because his daughter Sati had married Shiva against his wishes….Lord Shiva then carried Sati’s body all over the world in a state of wild grief. At the request of all other gods, Lord Vishnu severed Sati’s body into 51 pieces with his Sudarshan Chakra…
स्कंद पुराण में कहा गया है कि ’त्रिभिः सारस्वतं पुण्यं समाहेन तु यामुनम्। साद्यः पुनाति गांगेयं दर्शनादेव नर्मदा॥’ The Narmada River is considered the mother and giver of peace. Legend has it that the mere sight of this river is enough to cleanse one’s soul, as against a dip in the Ganga or seven in the Yamuna.

ॐ हनुमंते नमः
दुनिया चले ना श्रीराम के बिना।
रामजी चले ना हनुमान के बिना॥
According to religious almanacs (panchangs) the birthday of Hanuman falls on the fourteenth day (chaturdashi) in the dark fortnight of the month of Ashvin while according to others it falls on the full moon day in the bright fortnight of Chaitra.
Hanuman Jayanthi : Chaitra Purnima, Thursday 9 April 2009
चैत्र सुदी पूर्णिमा के दिन ही हनुमान जयंती मनाते हैं । अंजनीको भी दशरथकी रानियोंके समान तपश्चर्याद्वारा पायस (चावलकी खीर, जो यज्ञ-प्रसादके तौरपर बांटी जाती है) प्राप्त हुई थी व उसे खानेके उपरांत ही हनुमानका जन्म हुआ था । उस दिन चैत्रपूर्णिमा थी, जो `हनुमान जयंती’ Hanuman Jayanti के तौरपर मनाई जाती है ।
इस दिन वाल्मीकीय रामायण अथवा तुलसीकृत श्रीरामचरितमानसके सुन्दरकाण्डका या हनुमानचालीसाके अखण्ड पाठका आयोजन करना चाहिये। हनुमान्जीका गुणगान, भजन एवं कीर्तन करना चाहिये । श्री हनुमान्जीके विग्रहका सिन्दूरसे श्रृंगार करना चाहिये । नैवेधमें गुड, भीगा चना या भुना चना तथा बेसनका लड्डू रखना चाहिये।
हनुमान : इंद्र द्वारा वज्र से प्रहार करने से उनकी हनु (ठुड्डी) टूट जाने के कारण ही उन्हें हनुमान कहा जाने लगा। प्रहार से मूर्छित हनुमान को जल छिड़ककर पुन: सचेत कर प्रत्येक देवता ने उनको अपने-अपने दिव्य अस्त्र-शस्त्र दिए जिसके कारण उनका नाम महावीर हुआ। हनुमानजी को बजरंगबली, केसरी नंदन, अंजनीपुत्र, पवनपुत्र आदि अनेक नामों से जाना जाता है।
हनुमान बुद्धि और बल के दाता हैं। उत्तरकांड में भगवान राम ने हनुमानजी को प्रज्ञा, धीर, वीर, राजनीति में निपुण आदि विशेषणों से संबोधित किया है। हनुमान बल और बुद्धि से संपन्न हैं। उनको मानसशास्त्र, राजनीति, साहित्य, तत्वज्ञान आदि शास्त्रों का गहन ज्ञान है। उन्हें ग्यारहवें व्याकरणकार और रुद्र का अवतार माना जाता है।

पद्मपुराणके उत्तरखण्डमें माघमासके माहात्म्यका वर्णन करते हुए कहा गया है कि व्रत, दान और तपस्यासे भी भगवान् श्रीहरिको उतनी प्रसन्नता नहीं होती, जितनी कि माघ महीनेमें स्न्नानमात्रसे होती है । इसलिये स्वर्गलाभ, सभी पापोंसे मुक्ति और भगवान् वासुदेवकी प्रीति प्राप्त करने के लिये प्रत्येक मनुष्यको माघस्न्नान करना चाहिये।
जिन मनुष्यों को चिरकालतक स्वर्गलोकमें रहनेकी इच्छा हो, उन्हें माघमासमें सूर्यके मकरराशिमें स्थित होनेपर अवश्य स्न्नान करना चाहिये।
माघमासकी ऐसी विशेषता है कि इसमें जहाँ-कहीं भी जल हो, वह गंगाजल के समान होता है, फिर भी प्रयाग, काशी, नैमिषारण्य, कुरूक्षेत्र, हरिद्वार तथा अन्य पवित्र तीर्थों और नदियोंमें स्न्नानका बडा महत्व है।
जो माघमासमें ब्राह्मणोंको तिल दान करता है, वह समस्त जन्तुओंसे भरे हुए नरक का दर्शन नहीं करता। (महा० अनु० ६६ । ८)
इस माघमासमें पूर्णिमाको जो व्यक्ति ब्रह्मवैवर्तपुराणका दान करता है, उसे ब्रह्मलोककी प्राप्ति होती है । (मत्स्यपुराण ५३ । ३५)
महायोगीश्वर दत्तात्रेयजी भगवान् विष्णुके अवतार हैं। इनका अवतरण मार्गशीर्ष पूर्णिमाको प्रदोषकाल में हुआ था। अत: इस दिन बडे समारोहसे दत्तजयन्तीका उत्सव मनाया जाता है । The four dogs of Dattatreya are the embodiments of the four Vedas. Behind the Lord Dattatreya is the cow named Kamadhenu. This divine cow grants the wishes and desires of all those who seek the Lord. गिरनारक्षेत्र् श्री दत्तात्रेयजी का सिद्धपीठ् है। इनकी चरणपादुकाएँ वाराणसी तथा आबूपर्वत् आदि कई स्थानों पर् हैं।