उत्साह-संपन्नम् अदीर्घ-सूत्रं क्रिया-विधिज्ञं व्यसनेष्व् असक्तम् |
शूरं कृतज्ञं दृढ-सौहृदं च- लक्ष्मीः स्वयं वाञ्छति वास-हेतोः ||
Shraddha Tarpan 2010 दूसरेकी भूमिपर श्राद्ध नहीं करना चाहिये। जंगल, पर्वत, पुण्यतीर्थ और देवमन्दिर – ये दूसरेकी भुमिमें नहीं आते; क्योंकि इनपर किसीका स्वामित्व नहीं होता । – कूर्मपुराण ….