Lakshmiji (laxmi) ki Aarti : सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही । ज्ञान बुद्घि विघा दो मोही ॥ तुम समान नहिं कोई उपकारी । सब विधि पुरवहु आस हमारी ॥ जय जय जगत जननि जगदम्बा । सबकी तुम ही हो अवलम्बा ॥ तुम ही हो सब घट घट वासी । विनती यही हमारी खासी ॥ जगजननी जय सिन्धु कुमारी । दीनन की तुम हो हितकारी ॥
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी । तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ टेक ॥ मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को । उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्रबदन नीको ॥ जय 0.. कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै । रक्त पुष्प गलमाला, कण्ठन पर साजै ॥ जय0..केहरि वाहन राजत, खड़ग खप्परधारी । सुर नर मुनिजन सेवक, तिनके दुखहारी ॥ जय 0….
Om Jai Jagadish Hare Aarti :: ॐ जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे || ॐ जय|| जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का स्वामी दुख बिनसे मन का…..
Shri Krishna Janmashtami Vrat : Fri 14, August 2009 इस दिन केले के खंभे , आम अथवा अशोक के पल्लव आदि से घरका द्वार सजाया जाता है । दरवाजे पर मंगल कलश एवं मूसल स्थापित करे । रात्रिमें भगवान् श्रीकृष्ण की मूर्ति अथवा शालग्रामजी को विधिपूर्वक पंचामृत से स्नान कराकर षोडशोपचार से विष्णु पूजन करना चाहिऐ । ‘ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ‘ - इस मन्त्र से…..
Â
॥ द�हा ॥
�य �ण�श �िरि�ा स�वन, म��ल �अ