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Articles tagged with: krishna

Festivals and Celebrations »

[10 Oct 2008 | No Comment | ]

आश्‍इवन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा sharad Purnima कहते हैं। इसे रास पूर्णिमा Raas Poornima भी कहते हैं। सम्पूर्ण वर्ष में आश्विन मास की पूर्णिमा का चन्द्रमा ही षोडस कलाओं का होता है। इस दिन प्रात:काल आराध्य देव को सुन्दर वस्त्राभूषणों से सुशोभित करें । आसन पर विराजमान कर गंध,..

Mantra, Stotra & Stuti, Shri Krishna Janmashtami 2008 »

[6 Sep 2008 | No Comment | ]

|| श्री राधायाः परीहारस्तोत्रम् ॥ त्वं देवी जगतां माता विष्णुमाया सनातनी । कृष्णप्राणाधिदेवि च कृष्णप्राणाधिका शुभा ॥ १॥
कृष्णप्रेममयी शक्तिः कृष्णसौभाग्यरूपिणी । कृष्णभक्तिप्रदे राधे नमस्ते मङ्गलप्रदे ॥ २॥ अद्य मे सफलं जन्म जीवनं सार्थकं मम ।
पूजितासि मया सा च या श्रीकृष्णेन् पूजिता ॥ ३॥…

Mantra, Stotra & Stuti, Shri Krishna Janmashtami 2008 »

[24 Aug 2008 | No Comment | ]

वंशीविभूषितकरान्नवनिरदाभात्‌, पीताम्बरादरुणविम्बफलाधरोष्ठात्‌ । “Lord Shree Krishna who has Flute in His hand,Whose Glory is spreading on all four corners of the Universe, Who is wearing yellow clothes…

Mantra, Stotra & Stuti, Shri Krishna Janmashtami 2008 »

[23 Aug 2008 | No Comment | ]

श्रीकृष्ण विष्णो मधुकैटभारे भक्तानुकम्पिन् भगवन् मुरारे । त्रायस्व माम् केशव लोकनाथ गोविंद दामोदर माधवेति ॥ ‘हे श्रीकृष्ण ! हे विष्णो ! हे मधुकैटभको मारनेवाले ! हे भक्तोंके ऊपर अनुकम्पा करनेवाले ! हे भगवन्‌ ! हे मुरारे ! हे केशव ! हे लोकेश्वर ! हे गोविन्द ! हे दामोदर ! हे माधव ! मेरी रक्षा करो, रक्षा करो’ ॥२॥….

Mantra, Stotra & Stuti, Shri Krishna Janmashtami 2008 »

[23 Aug 2008 | No Comment | ]

कृष्ण मन्त्र (Krishna Mantra) :: ॐ क्लीं कृष्णाय गोविंदाय गोपीजन वल्लभाय स्वाहा । ॐ देवकी नन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि, तन्‍नो कृष्णः प्रचोदयात्‌ । श्रीकेशवाय नमः । नारायणाय नमः । माधवाय नमः । गोविंदाय नमः । विष्णवे नमः । मधुसूदनाय नमः ।…..

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[23 Aug 2008 | 4 Comments | ]

108 Names of Lord Krishna::: Achala - Krishna Who is Still and Motionless, Achyuta - Krishna Who is Infallible, Adbhutah - Krishna Who is Opulant and Wondrous,Adidev - Krishna who is the God of gods and goddesses,Aditya - Krsna who is the Son Of Aditi, Ajanma - Krsna Who Is Infinite And…….

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[23 Aug 2008 | No Comment | ]

Om Jai Jagadish Hare Aarti :: ॐ जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे || ॐ जय|| जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का स्वामी दुख बिनसे मन का…..

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[21 Aug 2008 | No Comment | ]

कस्तुरी तिलकम ललाटपटले, वक्षस्थले कौस्तुभम ।”Oh Shri Krishna ! You have been decorated with Kasturi Tilakam, a beautiful Namam on the smooth forehead; You have an ornament of Kausthubham on your Vakshasthalam, the seat of Sri Maha Lakshmi (on the chest); On the nose, You have…..

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[20 Aug 2008 | No Comment | ]

हे श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे हे नाथ नारायण वासुदेवाय || हे आकर्षक तत्व मेरे प्रभो, इन्द्रियों को वशीभूत करो, दुःखों का हरण करो, समस्त बुराईयों का बध करो, मैं सेवक हूँ…….

Festivals and Celebrations, Shri Krishna Janmashtami 2008 »

[17 Aug 2008 | No Comment | ]

इस दिन केले के खंभे , आम अथवा अशोक के पल्लव आदि से घरका द्वार सजाया जाता है । दरवाजे पर मंगल कलश एवं मूसल स्थापित करे । रात्रिमें भगवान् श्रीकृष्ण की मूर्ति अथवा शालग्रामजी को विधिपूर्वक पंचामृत से स्नान कराकर षोडशोपचार से विष्णु पूजन करना चाहिऐ । ‘ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ‘ - इस मन्त्र से…..

Festivals and Celebrations, Shri Krishna Janmashtami 2008 »

[17 Aug 2008 | No Comment | ]

Radhaashtami, Vaishnav Devotee celebrates the birthday of RadhaRani. She was born in Barsana, 30 Km from Mathura, and she appeared as the daughter of King Vrishabhano and Mata Kirati.Radhaji was older to Sri Krishna and it is believed that the Divine girl did not open her eyes until Krishna was born…….

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[17 Aug 2008 | No Comment | ]

Skandpuran स्कन्दपुराण के मतानुसार जो भी व्यक्ति जानकर भी कृष्ण जन्माष्टमी व्रत को नहीं करता, वह मनुष्य जंगल में सर्प और व्याघ्र होता है। वसिष्ठ संहिता का मत है- यदि अष्टमी तथा रोहिणी इन दोनों का योग अहोरात्र में असम्पूर्ण भी हो तो मुहूर्त मात्र में भी अहोरात्र के योग में उपवास करना चाहिए।…..

Festivals and Celebrations »

[11 Aug 2008 | No Comment | ]

श्रावण शुक्लकी एकादशी Pavitra पवित्रा, पुत्रदा और पापनाशिनी होती है। इस व्रतसे पापोंका नाश और पुत्रादिकी प्राप्ति होती है। संकल्प Sankalp - ‘मम समस्तदुरितक्षयपूर्वकं श्रीपरमेश्वरप्रीत्यर्थं श्रावणशुक्लैकादशीव्रतमहं करिष्ये ।’ यह संकल्प करके भक्तिभाव और विधानसहित भगवान्‌का पूजन करे। श्रावण शुक्लकी एकादशीको Ekadashi भगवान्‌को पवित्रक अर्पण किया जाता है।….

Gyaan Guru »

[4 Jul 2008 | No Comment | ]

श्रीजगन्नाथजीका जो लोग भक्तिपूर्वक दर्शन करते हैं, उनका भगवान्‌के धाममें निवास होता है। जिनके नामका संकीर्तन करनेमात्रसे सौ जन्मोंका पाप नष्ट हो जाता है, रथमें स्थित हो महावेदीकी ओर जाते हुए उन पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण, बलभद्र और सुभद्राजीका दर्शन करके मनुष्य अपने करोडों जन्मोंके पापोंका नाश कर लेता है ….