Satsang (सत्संग)

नित्य वृद्धजनोंको प्रणाम करनेसे तथा उनकी सेवा करनेसे मनुष्यकी आयु, विद्या (बुद्धि, कीर्ति), यश और बल बढ़ते हैं।


- मनुस्मृति २।१२१, भविष्यपुराण, महाभारत

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Shri Krishna Janmashtami Vrat and Puja Muhurat

Damodar LilaDamodar Lila

Sri Krishna Janmashtami 2010

1 September 2010: बुधवार - अर्धरात्रि व्यापिनी , रोहिणी योग

2 September 2010: गुरूवार - उदय व्यापिनी अष्टमी तिथि

श्रीमद्भागवत , भविष्यपुराण, अग्नि आदि पुराणों के अनुसार  भगवान् श्रीकृष्ण (Lord Krishna) का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी , बुधवार , रोहिणी नक्षत्र एवं वृष के चन्द्रमा कालीन अर्धरात्रि के समय हुआ था |

1 September, बुधवार को ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का कर्मकाल , अर्धरात्रि अष्टमी , वृषस्थ चन्द्र , चंद्रोदय काल , रोहिणी नक्षत्र एवं च बुधवार का महा संयोग है |

अगले दिन 2 September , गुरूवार की अर्धरात्रि के समय अष्टमी तिथि का अभाव है | 2 Sep को अष्टमी एवं रोहिणी नक्षत्र का संयोग केवल प्रात: सूर्योदय से १० घं ४२. मिं. तक रहेगा |

रोहिणी नक्षत्र एवं बुधवार को होने से इस दिन जयंती योग भी रहेगा |

ऋषि व्यास , नारद आदि ऋषियों के मतानुसार सप्तमी युक्त अष्टमी ही व्रत , पूजन आदि हेतु ग्रहण करनी चाहिए |

वैष्णव संप्रदाय के अधिकाँश लोग उदयकालिक नवमी युता श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को ग्रहण करते हैं | (i.e Thu, 2 Sep 2010)

Vrat and Puja Vidhi

Jai Shri Krishna

Shree Krishna Janmotsav 2010: How to Celebrate?

ISKCON desire tree - Sri Sri Radha Kunjbihari 08

Shri Krishna Janmashtami Vrat : Thu, 2 September 2010

Sri Krishna Janmashtami Pujan Vidhi

and

Aarti Shree Kunj Bihari Ki

इस दिन केले के खंभे , आम अथवा अशोक के पल्लव आदि से घरका द्वार सजाया जाता है । दरवाजे पर मंगल कलश एवं मूसल स्थापित करे । रात्रिमें भगवान् श्रीकृष्ण की मूर्ति अथवा शालग्रामजी को विधिपूर्वक पंचामृत से स्नान कराकर षोडशोपचार से विष्णु पूजन करना चाहिऐ ।

‘ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ‘ - इस मन्त्र से पूजन कर तथा वस्त्रालंकर आदि से सुसज्जित करके भगवान् को सुन्दर सजे हुए हिंडोले में प्रतिष्ठित करे । धूप, दीप और अन्नरहित नैवेध तथा प्रसूति के समय सेवन होने वाले सुस्वाद मिष्ठान , जयेकेदार नमकीन पदार्थो एवं उस समय उत्तपन्न होने वाले विभिन्न प्रकार के फल, पुष्पों और नारियल , छुहारे , अनार बिजौरे, पंजीरी, नारियल के मिष्ठान तथा नाना प्रकार के मेवे का प्रसाद सजाकर श्रीभगवान् को अर्पण करे ।

दिन में भगवान् की मूर्ति के सामने बैठकर कीर्तन करे तथा भगवान् का गुणगान करे और रात्रिको बारह बजे गर्भ से जन्म लेने के प्रतीक स्वरुप खीरा फोड़कर भगवान् का जन्म कराये एवं जन्मोत्सव मनाये । जन्मोत्सव के पश्चात कर्पूरादी प्रज्वलित कर समवेत स्वर से भगवान् की आरती स्तुति करे, पश्चात प्रसाद वितरण करे।

आरती कुंजबिहारी की

आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।
गले में बैजन्तीमाला बजावैं मुरलि मधुर बाला॥
श्रवण में कुंडल झलकाता नंद के आनंद नन्दलाला की ।। आरती…।।
गगन सम अंगकान्ति काली राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर-सी अलक कस्तूरी तिलक।
चंद्र-सी झलक ललित छबि श्यामा प्यारी ।। आरती…।।
कनकमय मोर मुकुट बिलसैं देवता दरसन को तरसैं।
गगन से सुमन राशि बरसैं बजै मुरचंग मधुर मृदंग।
ग्वालिनी संग-अतुल रति गोपकुमारी की ।। आरती…।।
जहाँ से प्रगट भई गंगा कलुष कलिहारिणी गंगा।
स्मरण से होत मोहभंगा बसी शिव शीश जटा के बीच।
हरै अघ-कीच चरण छवि श्री बनवारी की ।। आरती…।।
चमकती उज्ज्वल तट रेनू बज रही बृंदावन बेनू।
चहुँ दिशि गोपी ग्वालधेनु हँसत मृदुमन्द चाँदनी चंद।
कटत भवफन्द टेर सुनु दीन भिखारी की ।। आरती…।।
|| Jai Shree Radhey ||

ॐ जय जगदीश हरे Aum Jai Jagadish Hare Aarti

Om Jai Jagadish Hare Aarti :: ॐ जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे || ॐ जय|| जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का स्वामी दुख बिनसे मन का…..

108 Names of Lord Sri Krishna

108 Names of Lord Sri Krishna::: Achala - Krishna Who is Still and Motionless, Achyuta - Krishna Who is Infallible, Adbhutah - Krishna Who is Opulant and Wondrous,Adidev - Krishna who is the God of gods and goddesses,Aditya - Krsna who is the Son Of Aditi, Ajanma - Krsna Who Is Infinite And…….

Sri Krishna Stotra : गोविंद दामोदर माधवेति

Govind Damodar Madhveti Stotra श्रीकृष्ण विष्णो मधुकैटभारे भक्तानुकम्पिन् भगवन् मुरारे । त्रायस्व माम् केशव लोकनाथ गोविंद दामोदर माधवेति ॥ ‘हे श्रीकृष्ण ! हे विष्णो ! हे मधुकैटभको मारनेवाले ! हे भक्तोंके ऊपर अनुकम्पा करनेवाले ! हे भगवन्‌ ! हे मुरारे ! हे केशव ! हे लोकेश्वर ! हे गोविन्द ! हे दामोदर ! हे माधव ! मेरी रक्षा करो, रक्षा करो’ ॥२॥….