Satsang (सत्संग)

बुद्धिमान्‌ मनुष्यको राजा, ब्राह्मण, वैध, मूर्ख, मित्र, गुरु और प्रियजनोंके साथ विवाद नहीं करना चाहिये।



- चाणक्यसुत्र ३५२

— Chanakya

Shravan Mas 2009 : श्रावण शिवाराधन

shivalingas.

Aum Namah Shivay

Shavan Maas : Wed, 8 July 2009 to Thu, 6 August 2009

First Monday : 13th July

The month of Shravan is the fifth month of the Hindu calender beginning from Chaitra, and is the most auspicious month of the Chaturmas. On Purnima or fullmoon day, or during the course of the month the star ‘Shravan’ rules the sky, hence the month is called Shavan. This month is spread out with innumerably religious festivals and ceremonies and almost all the days of this month are auspicious.

Shravan Month श्रावण मासमें आशुतोष भगवान्‌ शंकरकी पूजाका विशेष महत्व है। जो प्रतिदिन पूजन न कर सकें उन्हें सोमवारको शिवपूजा अवश्य करनी चाहिये और व्रत रखना चाहिये। सोमवार भगवान्‌ शंकरका प्रिय दिन है, अत: सोमवारको शिवाराधन करना चाहिये।

श्रावणमें पार्थिव शिवपूजाका विशेष महत्व है। अत: प्रतिदिन अथवा प्रति सोमवार तथा प्रदोषको शिवपूजा या पार्थिव शिवपूजा अवश्य करनी चाहिये।

सोमवार (Shravan Somvar) के व्रत के दिन प्रातःकाल ही स्नान ध्यान के उपरांत मंदिर देवालय या घर पर श्री गणेश जी की पूजा के साथ शिव-पार्वती और नंदी की पूजा की जाती है। इस दिन प्रसाद के रूप में जल  ,  दूध  ,  दही  ,  शहद  ,  घी  ,  चीनी  ,  जने‌ऊ  ,  चंदन  ,  रोली  ,  बेल पत्र  ,  भांग  ,  धतूरा  ,  धूप  ,  दीप और दक्षिणा के साथ ही नंदी के लि‌ए चारा या आटे की पिन्नी बनाकर भगवान पशुपतिनाथ का पूजन किया जाता है। रात्रिकाल में घी और कपूर सहित गुगल, धूप की आरती करके शिव महिमा का गुणगान किया जाता है। लगभग श्रावण मास के सभी सोमवारों को यही प्रक्रिया अपना‌ई जाती है।

इस मासमें लघुरुद्र, महारुद्र अथवा अतिरुद्र पाठ करानेका भी विधान है।

इस मास के प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर शिवामूठ च़ढ़ा‌ई जाती है। वह क्रमशः इस प्रकार है :

प्रथम सोमवार को- कच्चे चावल एक मुट्ठी, दूसरे सोमवार को- सफेद तिल्ली एक मुट्ठी, तीसरे सोमवार को- ख़ड़े मूँग एक मुट्ठी, चौथे सोमवार को- जौ एक मुट्ठी और यदि पाँचवाँ सोमवार आ‌ए तो एक मुट्ठी सत्तू च़ढ़ाया जाता है।

शिव की पूजा में बिल्वपत्र (Belpatra) अधिक महत्व रखता है। शिव द्वारा विषपान करने के कारण शिव के मस्तक पर जल की धारा से जलाभिषेक शिव भक्तों द्वारा किया जाता है। शिव भोलेनाथ ने गंगा को शिरोधार्य किया है।

एक कथा के अनुसार श्रीविष्णु पत्नी लक्ष्मी ने शंकर के प्रिय श्रावण माह में शिवलिंग पर प्रतिदिन 1001 सफेद कमल अर्पण करने का निश्चय किया। स्वर्ण तश्तरी में उन्होंने गिनती के कमल रखे, लेकिन मंदिर पहुँचने पर तीन कमल अपने आप कम हो जाते थे। सो मंदिर पहुँचकर उन्होंने उन कमलों पर जल छींटा, तब उसमें से एक पौधे का निर्माण हु‌आ। इस पर त्रिदल ऐसे हजारों पत्ते थे, जिन्हें तोड़कर लक्ष्मी शिवलिंग पर चढ़ाने लगीं, सो त्रिदल के कम होने का तो सवाल ही खत्म हो गया।

और लक्ष्मी ने भक्ति के सामर्थ्य पर निर्माण कि‌ए बिल्वपत्र शिव को प्रिय हो ग‌ए। लक्ष्मी यानी धन-वैभव, जो कभी बासी नहीं होता। यही वजह है कि लक्ष्मी द्वारा पैदा किया गया बिल्वपत्र भी वैसा ही है। ताजा बिल्वपत्र न मिलने की दशा में शिव को अर्पित बिल्वपत्र पुनः चढ़ाया जा सकता है। बिल्वपत्र का वृक्ष प्रकृति का मनुष्य को दिया वरदान है।

सुहागन स्त्रियों को इस दिन व्रत रखने से अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है। विद्यार्थियों को सोमवार का व्रत रखने से और शिव मंदिर में जलाभिषेक करने से विद्या और बुद्धि की प्राप्ति होती है। बेरोजगार और अकर्मण्य जातकों को रोजगार तथा काम मिलने से मानप्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। सदगृहस्थ नौकरी पेशा या व्यापारी को श्रावण के सोमवार व्रत करने से धन धान्य और लक्ष्मी की वृद्धि होती है।

वहीं भगवान श्री कृष्‍ण के वृन्‍दावन में भी सावन के महीने में बहारें छायीं रहेंगीं, जहॉं झूलों और रास लीला‌ओं का परम्‍परागत उत्‍सव रहेगा वहीं कृष्‍ण साधना और कृष्‍ण पूजा भी इन दिनों भारी संख्‍या में होगी ।

सावन (shavan) के पूरे महीने जहॉं शिव और कृष्‍ण की पूजा और साधना परम्‍परा चलेगी वहीं शिवालय और कृष्‍ण मन्दिर इन दिनों लोगों के मेलों से घिरे रहेंगे ।

आज भी उत्तर भारत में कांवड़ परम्परा का बोलबाला है। श्रद्धालु गंगाजल लाने के लि‌ए हरिद्वार  ,  गढ़ गंगा और प्रयाग जैसे तीर्थो में जाकर जलाभिषेक करने हेतु कांवड़ लेकर आते हैं। यह सब साधन शिवजी की कृपा प्राप्त करने के लि‌ए है।

Total Solar Eclipse (खग्रास सूर्यग्रहण): 22 July 2009

खग्रास सूर्यग्रहण: यह ग्रहण श्रावण अमावस, बुधवार को भारत में ग्रस्तोदय खण्डग्रास, खण्डग्रास तथा खग्रास रुप में दिखाई देगा।

Total Solar Eclipse 2008: Corona

Solar Eclipse (Surya Grahan) : 22 July 2009

Time : from 5.28 AM (IST) to 10.42 AM (IST)

* in india, it will last till 7.39 AM IST

Total/Partial Solar eclipse (Surya Grahan) will be visible in India, some of the Japanese islands, China and Pacific Ocean. The eclipse begins with the sunrise in the western part of India, travels to eastern part of India, crosses to Myna-mar (Burma), small islands of Japan and China. In India Surat, Indore, Bhopal, Jabalpur, Varanasi and Patna are some of the cities lie close to the central part of the totality. In China duration of the totality will be about 5 minutes. In India altitude of the sun will be about 15 degrees in the eastern part at the time of total eclipse and this period is full of rains due to South West monsoon.

खग्रास मार्ग के मध्य पडने वाले नगरों में आप दिन (प्रात:) के समय ही रात जैसा अद्भुत दृश्य देख सकते हैं। प्रात: मंगल, शुक्र को पूर्व में तथा गुरु को पश्चिमी आकाश में देख सकते हैं। प्रात: ७/३० बजे तक अन्य प्रमुख तारे भी टिमटिमाते नजर आएंगे । खग्रास प्रारम्भ एवं समाप्ति पर हीरे जैसी आकृति भी आप देख सकते हैं।

खग्रास मार्ग (Path of the Total Solar Eclipse)

खग्रास मार्ग (Path of the Total Solar Eclipse)

Sutak ग्रहण का सूतक - इस ग्रहण का सूतक सामान्यत: 21 July,2009 के सूर्यास्त से प्रारम्भ हो जायेगा । लेकिन ग्रस्तोदय ग्रहण हो तो स्पर्शकाल से ठीक १२ घण्टे पूर्व लगभग 17:28 Hrs (IST) से प्रारम्भ हो जायेगा।

At the time of the eclipse, people bathe in the sacred rivers. They do charitable acts. They give cows, money and gold. The day after the eclipse they feed the poor, the Brahmins and the Sadhus. After the eclipse they clean their houses, vessels, etc., and take a bath before they start cooking.

One should not take food during the eclipse. When the eclipse begins the food should by then have been digested. One should take food only after seeing the sun or the moon free from the eclipse. When the clear sun or the moon is not seen before sunset or sunrise, in the case of the solar and lunar eclipse respectively, food can be taken only after the sun or the moon is seen the next day.

Pregnant women should not see the sun or the moon during the time of the eclipse. If they do the child born may have some kind of defect. He may be born deaf, dumb or blind.

गर्भवती महिलाओं को ग्रहणकाल में सब्ज़ी काटना, पापड सेंकनादि उत्तेजित कार्यों से परहेज़ करना चाहिए । Householders are forbidden from sexual intercourse on the day of the eclipse, for the same reason.

Those who do Japa at the time of the eclipse derive great benefits. The effect of Japa and Sankirtan during the eclipse contributes towards relieving the suffering of humanity and also of the planets. These people receive the blessings of the gods.

रजस्वला स्त्री गंगा आदि नदियों या सरोवर में डुबकी न लगाएं, अपितु पात्र द्वारा उसका पानी अलग लेकर स्नान करें।

ग्रहण का माहत्म्य - कुरुक्षेत्र, हरिद्वार आदि तीर्थों पर स्नानादि का अनन्त माहात्म्य होगा। ग्रहण में स्पर्श के समय स्नान, मध्य में होम और देवपूजन और ग्रहण मोक्ष के समय में श्राद्ध और अन्न, वत्र, धनादि का दान और सर्वमुक्‍त होने पर स्नान करें - यह क्रम है।

Effects and Remedies of Solar Eclipse (22 July 2009) on birth signs:

ग्रहण का राशियों पर प्रभाव: यह ग्रहण कर्क राशि तथा पुष्य नक्षत्र में घटित हो रहा है । अतएव इस राशि तथा इस नक्षत्र में पैदा हुए जातक/जातिका के लिये यह ग्रहण विशेष अशुभप्रद एवं उथल-पुथल वाला रहेगा।

बारह राशियों पर Surya Grahan का प्रभाव एवं उपाय

Chaturmas (four months): Hindu God & Goddesses at rest

देवशयनी एकादशी (३ जुलाई) से लेकर कार्तिक शुक्ल एकादशी पर्यन्त धर्मपरायण तपस्वी
लोग चातुर्मास्य व्रतादि नियमों का पालन करेंगे । श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिकमासमें जलशायी जगदीश्वर भगवान्‌ का पूजन करे तथा नमकरहित अन्न भोजन करे। व्रत समाप्त होनेपर श्रेष्ठ ब्राह्मणको भक्तिपूर्वक दान दे। जौ, धान्य, शय्या, वस्त्र तथा सुवर्ण दक्षिणामें दे । जो मनुष्य एकाग्रचित हो इस प्रकार …

Guru Purnima : गुरु साक्षात्‌ परब्रह्म तस्मै श्रीगुरुवे नमः॥

Guru Poornima : Tuesday 7 July, 2009, THE FULL moon day in the month of Ashad (July-August) is an extremely auspicious and holy day of Guru Purnima. On this day, sacred to the memory of the great sage, Bhagavan Sri Vyasa…

जगत्‌के नाथ - जगन्‍नाथ : The Master of Universe

श्रीजगन्नाथजीका जो लोग भक्तिपूर्वक दर्शन करते हैं, उनका भगवान्‌के धाममें निवास होता है। जिनके नामका संकीर्तन करनेमात्रसे सौ जन्मोंका पाप नष्ट हो जाता है, रथमें स्थित हो महावेदीकी ओर जाते हुए उन पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण, बलभद्र और सुभद्राजीका दर्शन करके मनुष्य अपने करोडों जन्मोंके पापोंका नाश कर लेता है ….