उत्साह-संपन्नम् अदीर्घ-सूत्रं क्रिया-विधिज्ञं व्यसनेष्व् असक्तम् |
शूरं कृतज्ञं दृढ-सौहृदं च- लक्ष्मीः स्वयं वाञ्छति वास-हेतोः ||
Om Jai Jagadish Hare Aarti :: ॐ जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे || ॐ जय|| जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का स्वामी दुख बिनसे मन का…..